सुहानी बरसात

स्कूल से भागते दोढ़ते घर को आते
बैग फेक, वापस भीगने जाते!
माँ पीछे से पकड़ने आती,
और अच्छी वाली फटकार लगाती!
उस फटकार को मे आज भी याद करता हु,
वेसी ही सुहानी बरसात की मे आस करता हु!

जिद करके पकोड़े बनवाते,
और बहन के हिस्से का भी खा जाते!
फिर शुरू करती वो रोना,
और बोलती ”माँ! भैया को देखो ना!”
उसे चिढ़ाने को मे आज भी याद करता हु,
वेसी ही सुहानी बरसात की मे आस करता हु!

जब भीगने से लग जाती थी सर्दी,
माँ पिलाती थी दूध मिला के हल्दी!
हम आनाकानी करते उसे पीते थे,
क्योकि माँ की प्यार भरी डांट से डरते थे!
उस प्यार भरे दूध को मे आज भी याद करता हु,
वेसी ही सुहानी बरसात की मे आस करता हु!

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2 thoughts on “सुहानी बरसात

  1. Ruppesh Nalwaya June 8, 2013 at 1:19 pm Reply

    mai bhi us suhani barsa ko yaad karta hu 🙂
    nice work arnav

  2. Arnav Puri June 12, 2013 at 5:26 pm Reply

    Thanks Bhai 🙂

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